मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

हवाबाज़ी की राजनीति...

सहिष्णुता या असहिष्णुता की बहस किसी फ़ोल्डिंग चारपाई सरीखी हो चली है और जब जिसे मन कर रहा है बिछा कर आराम कर लेता है और जब काम निकल जाता है तब मोड़ कर दीवार पर टिका कर आराम से निकल लेता है। सिर्फ़ बिहार चुनाव के समय एवार्ड वापसी, आमिर खान और शाहरुख़ खान के हालिया दिए गए बयान और उनपर आयी प्रतिक्रिया इस बात की पुष्टि करते से लगते हैं। अब इसका हमारे आम जीवन पर कितना प्रभाव पड़ा है? सोच कर देखिए ज़रा? फ़िलहाल अब इस बहस से असली आम आदमी(टोपी वाला आम आदमी नहीं) इतना ऊब चुका है कि उसे इससे मुक्ति चाहिए। कोई सहिष्णु हो या न हो लेकिन फ़ालतू की बात पर ऊर्जा खपाने का लाभ नहीं!

फ़िलहाल आज कल मुझे जो बात सबसे अधिक विचलित करती है, वह है भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विपक्ष का इस क़दर नकारात्मक हो जाना। वह सरकार के विरोध में देशद्रोह की हरकतों पर उतर आया है। इसी चिढ़ में हमारा विपक्ष पाकिस्तान जैसे देशों से मोदी सरकार गिराने के लिए मदद और समर्थन ले आया है। यह लोग झूठ और अनर्गल प्रलाप करते हुए कोई भी बात की हवाबाज़ी करके असली विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। झूठ बोलना, झूठ चिल्लाना और सिर्फ़ पर्सेप्शन की हवाबाज़ी करते रहना ही उसे अकेला रास्ता दीख रहा है। इस बात को मानने में कोई शक नहीं कि कांग्रेस हमेशा घोटाले ही करती आयी और तंत्र को अपनी लूट के लिए इस्तेमाल करती आयी है। आज जब कांग्रेस के शीर्षस्थ नेतृत्व चारसौबीसी के मामले में आरोपी हैं और ज़मानत पर बाहर हैं तो ऐसे में कांग्रेसियों का ऐसा पर्सेप्शन बनाना मानो गांधीजी के "अंग्रेज़ों भारत छोड़ो" टाइप की कोई क्रांतिकारी मामले में माँ बेटे जेल जा रहे हो।

अब भाई सीधा सीधा मामला धोखाधड़ी और चारसौबीसी का है... ठीक ऐसा ही कुछ नौटंकी केजरीवाल ने नितिन गड़करी मामले में भी किया था और उसका उन्हें भरपूर राजनैतिक लाभ भी मिला था। मीडिया ने पूरी कवरेज दी, नौटंकी हुई और बाद में लिखित माफ़ी माँगी गयी। जिस मीडिया ने आरोपी की गिरफ़्तारी को किसी हीरो सरीखी कवरेज दी उसी मीडिया ने माफ़ी की कवरेज को पूरी तरह से दबाया। ऐसा ही कुछ केजरीवाल के बाद अब कांग्रेसी माँ बेटे के मामले में होता दिख रहा है। दरअसल आज विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए कोई मुद्दा नहीं है। विकास पर वह घेर नहीं सकती, गवरनेंस पर घेर नहीं सकती, किसी और राजनैतिक, कूटनीतिक मुद्दे पर नहीं घेर सकती तो ऐसे में वह अपना अस्तित्व बचाए तो कैसे? सो बाहरी देशों से आ रहे पैसे और चंदे का साथ और बाहरी देशों के नियंत्रण में चलने वाला मीडिया यह दोनों ही मिलकर देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं। देश के संघीय ढाँचे को मजबूत करना इन्हें बहुत मुश्किल लग रहा है। एक और बड़ा कारण यह भी है कि कांग्रेस को विपक्ष में रहने की आदत नहीं है सो वह आज भी बौखलाई हुई है और इसी बौखलाहट में उसे सही और ग़लत की पहचान ही नहीं हो पा रही। यदि विपक्ष एक सकारात्मक माहौल बनाए, देश के समग्र विकास में साथ दे तब स्थिति कितनी सुधर जाएगी। लेकिन सोनिया और राहुल जैसे भ्रष्ट नेतृत्व में ऐसा होना असम्भव ही है, रही सही कसर नौटंकीलाल ने पूरी कर दी है!!


कोई टिप्पणी नहीं: